सरस्वती शिशु मन्दिर/उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कृष्णनगर देश का एक उत्कृष्ट विद्यालय है। यह विद्यालय अपने उत्कृष्ट वातावरण के कारण अनेक प्रतिभाओं का निर्माण कर चुका है। यहाँ से निकले विद्यार्थी आज आई.ए.एस., आई.पी.एस., आई.एफ.एस., वैज्ञानिक, प्रोफेसर, डाॅक्टर, इंजीनियर, वास्तुविद, राजनैतिक नेतृत्व, बडे-बडे़ प्रतिष्ठानों के संचालक एवं सेना के उच्च पदों पर देश की सेवा कर रहे हैं। गौरव की बात यह है कि थल सेना के अध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी इसी विद्यालय के पूर्व छात्र रहे हैं। यह विद्या उपार्जन का एक मात्र ऐसा केन्द्र है जिसका उद्देश्य हिन्दुत्वनिष्ठ एवं राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत तथा शारीरिक, प्राणिक, मानसिक,बौद्धिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से पूर्ण विकसित युवा पीढ़ी का निर्माण करना है जो जीवन की वर्तमान चुनौतियों का सामना सफलता पूर्वक कर सके और भारतीय परम्पराओं को पुनर्प्रतिष्ठित करते हुये वसुधैव कुटुम्बकम के भाव से प्रेरित होकर विश्व कल्याण के लिए समर्पित हो।
एक प्राचार्य के रूप में मैं यह मानता हूँ कि शिक्षा केवल अंको की प्राप्ति का साधन नहीं है बल्कि जीवन को उत्कृष्ट बनाने की प्रक्रिया है। हमारे वेदों में कहा गया है "सा विद्या या विमुक्तये" अर्थात वही विद्या है जो हमें अज्ञान और बन्धनों से मुक्ति दिलाये इसी लिये विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम का ज्ञान देना नहीं बल्कि संस्कार,चरित्र और जीवन मूल्यों से समृद्ध करना भी है। Education is not just about learning facts but about shaping character and building better future.
शिक्षकों के सन्दर्भ में वेद पुराण हमें गुरु के महत्व को स्पष्ट रूप से बताते हैं। गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः
गुरु ही सृजन,पालन और परिवर्तन के प्रतीक हैं। एक शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाला नहीं बल्कि वह मार्गदर्शक होता है जो विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देता है। Teachers are the backbone of any Educational institution and its dedication and commitment to shape the destiny of the nation
विद्यार्थियों के लिये हमारे शास्त्रों में अनेक प्रेरणादायक संदेश दिये गये हैं। "उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत" उठो,जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक निरंतर प्रयास करते रहो। विद्यार्थी जीवन परिश्रम,अनुशासन और आत्म संयम काल है। ैजनकमदज उनेज तमउंपद विबनेमकएकपेबपचसपदमक ंदक बनतपवने क्योंकि यही गुण उन्हे सफलता की उँचाइयों तक पहुँचाते हैं। वेदो में वर्णित गुरुकुल परम्परा हमें यह सिखाती है कि समर्पण और विनम्रता ही सच्चे ज्ञान की कुंजी है।
अभिभावकांे की भूमिका भी शिक्षा के इस पवित्र कार्य में अत्यंत महत्वपूर्ण है। पुराणों में वर्णित अनेक कथाएँ यह दर्शाती हैं कि माता-पिता बच्चों के प्रथम गुरु होते हैं। माता-पिता गुरु देवम् इनका स्थान सर्वोच्च माना गया है। Parents play a crucial role in nurturing values,discipline and moral strength in children यदि अभिभावक और शिक्षक मिलकर कार्य करें तो विद्यार्थी का समग्र विकास सुनिश्चित है।
विद्यालय एक ऐसा पवित्र स्थान है जहाँ शिक्षक,विद्यार्थी और अभिभावक तीनों मिलकर एक सशक्त समाज का निर्माण करते हैं। "विद्या ददाति विनयम,विनयाद्याति पात्रताम्" विद्या से विनय और विनय से पात्रता आती है। Therefore education must be holistic focusing not only on academic excellence but also on moral and ehical development जब ये तीनों घटक(शिक्षक,विद्यार्थी और अभिभावक) समन्वय के साथ कार्य करते हैं,तब शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य पूर्ण होता है।
अन्ततः मेरा यही संदेश है कि हम सभी मिलकर एक ऐसे वातावरण का निर्माण करें जहाँ ज्ञान के साथ-साथ संस्कारों,नैतिक मूल्यों,अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना का विकास हो। "सर्वे भवन्तु सुखिनः,सर्वे सन्तु निरामयाः" सभी सुखी और निरोगी रहें। Together we can create a generation that is not only intelligent but also responsible and compassionate यही हमारे विद्यालय और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। यही हमारी शिक्षा और जीवन का अन्तिम लक्ष्य होना चाहिये।
आइए, हम सब मिलकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आलोक में भैया/बहिनों और विद्यालय के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सहभागी बने।
साभार धन्यवाद
श्री मुद्रिका प्रसाद दुबे
प्राचार्य
| नाम | समय काल |
| श्री रामरतन वर्मा | 1973 से 30-06-77 |
| श्री श्याम किशोर वर्मा | 01-07-77 से 30-06-78 |
| श्री धर्मदास अग्रवाल | 01-07-78 से 29-10-96 |
| डॉ. भृगुनाथ पाण्डेय (प्रभारी ) | 29-10-96 से 25-06-97 |
| श्री कृष्णनन्द शुक्ला | 25-06-97 से 01-08-2001 |
| श्री जयनारायण मिश्रा (प्रभारी) | 09-08-2001 से 01-08-2003 |
| डॉ. देवेंन्र्द सिंह | 01-08-2003 से 30-04-2006 |
| श्री इन्द्रपती प्रसाद पाण्डेय | 13-06-2009 से 13-05-2009 |
| श्री विष्णुकांत त्रिपाठी | 01-06-2009 से 04-06-2012 |
| श्री उमाशंकर पाठक | 05-06-2012 से 13-06-2016 |
| श्री विष्णुकांत त्रिपाठी | 07-06-2016 से 17-08-2022 |
| श्री हिमांचल चतुर्वेदी | 18-08-2022 से 10-05-2023 |
| श्री गणेश प्रसाद मिश्रा | 11-05-2023 से 31-03-2026 |
| श्री मुद्रिका प्रसाद दुबे | 01-04-2026 से अब तक |


